आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",DUe"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम ",Due"
ग़ज़ल
दूद-ए-आह-ए-दिल-ए-सोज़ाँ है 'मुबारक' अपना
जो धुआँ शम्अ से बलीन-ए-मज़ार उठता है
मुबारक अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो
बशीर बद्र
ग़ज़ल
सलीम कौसर
ग़ज़ल
लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक
उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है