आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",al9e"
नज़्म के संबंधित परिणाम ",al9e"
नज़्म
विलायत पादशाही इल्म-ए-अशिया की जहाँगीरी
ये सब क्या हैं फ़क़त इक नुक्ता-ए-ईमाँ की तफ़्सीरें
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तब-ए-मशरिक़ के लिए मौज़ूँ यही अफ़यून थी
वर्ना क़व्वाली से कुछ कम-तर नहीं इल्म-ए-कलाम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तेरी नज़र में हैं तमाम मेरे गुज़िश्ता रोज़ ओ शब
मुझ को ख़बर न थी कि है इल्म-ए-नख़ील बे-रुतब!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हम उन को देते हैं बे-जान और ग़लत तालीम
मिलेगा इल्म-ए-जिहालत-नुमा से क्या उन को
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
इल्लत-ए-रिश्वत को इस दुनिया से रुख़्सत कीजिए
वर्ना रिश्वत की धड़ल्ले से इजाज़त दीजिए
जोश मलीहाबादी
नज़्म
इक जुनूँ-पर्वर बगूला है वो इल्म-ए-बे-वसूक़
जिस की रौ में काँपने लगते हैं शौहर के हुक़ूक़
जोश मलीहाबादी
नज़्म
आल-ए-अबू-तालिब के क़दमों के निशाँ
इंसानियत को उस की मंज़िल का पता देते रहे हैं ता-अबद देते रहेंगे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
नज़्म
जो वाक़िफ़ नहीं तेरे दर्द-ए-निहाँ से
इसे भी तो ज़िल्लत की पाबंदगी के लिए आल-ए-कार बनना पड़ेगा