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नज़्म
मुरक़्क़ा' है हसीं तहरीक-ए-अफ़्सानी के ख़ाकों का
मुकम्मल इज्तिमा-ए-गौहर-ए-अय्याम है उर्दू
माजिद-अल-बाक़री
नज़्म
काश दे सकता तुझे हुस्न-ए-बसीरत तेरा फ़न
हर मुरक़्क़ा' तेरा बन जाता ख़ुद अपनी अंजुमन
अलीम जहाँगीर
नज़्म
गोर-ओ-मर्क़द पे यूँही सैर को आते होंगे
और सीनों में लिए हसरत-ओ-अरमाँ होंगे
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
तुझ से मिल कर आज मुझ को मदरसा याद आ गया
फिर वो तिफ़्ली का मुरक़्क़ा दिल मिरा तड़पा गया
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
वो हुस्न की तस्वीर वो ख़ूबी का मुरक़्क़ा
ज़ाहिद भी जो देखे न रहे ज़ब्त का यारा