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नज़्म
उन की शाख़ें ग़ैर-मरई तब्ल की आवाज़ पर देती हैं ताल
बीख़-ओ-बुन से आने लगती है ख़ुदावंदी जलाजिल की सदा
नून मीम राशिद
नज़्म
तुम्हारी दावत क़ुबूल मुझ को मगर तुम इतना ख़याल रखना
बीयर किसी भी ब्रांड की हो चिकन-फ़्राइड हलाल रखना
खालिद इरफ़ान
नज़्म
सर-ज़मीन-ए-हिंद का ये बाज़ू-ए-शमशीर-ज़न
जिस के मरदान-ए-जरी हैं शो'ला-बार-ओ-सफ़-शिकन
अर्श मलसियानी
नज़्म
सड़कों पे ये उड़ती फिरती है इक बर्ड हमारी बेटी है
मज़हब की पुरानी रस्मों से इंजर्ड हमारी बेटी है
खालिद इरफ़ान
नज़्म
सब सूर-बीर अपने इस ख़ाक में निहाँ हैं
टूटे हुए खँडर हैं या उन की हड्डियाँ हैं