आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "Gamze"
नज़्म के संबंधित परिणाम "Gamze"
नज़्म
क़यामत इस के ग़म्ज़े जान-लेवा हैं सितम इस के
हमेशा सीन-ए-मुफ़्लिस पे पड़ते हैं क़दम इस के
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तेरे हर ग़म्ज़े की तह में है बनावट का शिकवा
जिस के आगे सर-ब-सज्दा मासियत के दश्त-ओ-कोह
माहिर-उल क़ादरी
नज़्म
मैं हूँ इक झूट का बाज़ार ये माना मैं ने
मेरे ग़म्ज़े भी हैं तलवार ये माना मैं ने
इज़हार मलीहाबादी
नज़्म
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
हम पे मुश्तरका हैं एहसान ग़म-ए-उल्फ़त के
इतने एहसान कि गिनवाऊँ तो गिनवा न सकूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इन में सच्चे मोती भी हैं, इन में कंकर पत्थर भी
इन में उथले पानी भी हैं, इन में गहरे सागर भी
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-ब-दर मारा फिरूँ
ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ