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नज़्म
हिमायत अली शाएर
नज़्म
बासिर सुल्तान काज़मी
नज़्म
वो कितना ख़ुश-ख़िसाल था
वो कितना ख़ुश-जमाल था
जिलौ में अपने जो लिए था
लम्हा-ए-विसाल था
सईदुल ज़फर चुग़ताई
नज़्म
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
मैं कि सुब्ह-ए-अज़ल
जुस्तुजू-ए-बशर में चला था
जुस्तुजू-ए-बशर में चला था
आज तक रात-दिन सिर्फ़ चलता रहा
अली अब्बास उम्मीद
नज़्म
भूल के सब दुनिया के ग़म
झगड़ा होगा फिर इस बार
लड्डू पेड़े खाएँ हम
हम हैं दस और लड्डू चार