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नज़्म
लोग अटकाते हैं क्यूँ रोड़े हमारे काम में
जिस को देखो ख़ैर से नंगा है वो हम्माम में
जोश मलीहाबादी
नज़्म
गर मुझे इस का यक़ीं हो मिरे हमदम मिरे दोस्त
गर मुझे इस का यक़ीं हो कि तिरे दिल की थकन