aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "hazaar-gune"
दर्द हज़ार-गुनेचाँदी की चम्मच ले कर
हज़ार गुना सुकून तर हैं
हज़ार-गूना मलामत का बार उठाए हुएहवस-परस्त निगाहों की चीरा-दस्ती से
वो मुंतज़िर थीहज़ार सदियों से मुंतज़िर थी
समाअतें फूल चुन रही हैंकि ख़ाक में लू का इस्तिआरा
ज़िंदगी तीरा ग़ार के मानिंदऔर मैं रौशनी का शैदाई
कभी मोहब्बत को याद न बनने देनातुम्हें मा'लूम नहीं है
घने सुहाने छाँव छिड़कते बोर लदे छतनारबीस हज़ार में बिक गए सारे हरे भरे अश्जार
ज़िंदगीइस बार तेरी हार तय है
वो एक पंचवटी का विशाल सा जंगलजुगों जुगों से जहाँ इक अहिल्या की शिला
कभी ख़िरद की खुली धूप में चला आयाकभी मैं इश्क़ के साए में जा के बैठ गया
घने अँधेरों से फूटा सपीदा-ए-सहरीज़मीर-ए-ख़ाक में जागा मज़ाक़-ए-दीदा-वरी
जहाँ में इज़्तिराब हैनहीं नहीं
वो पर्दा रू-ए-पुर-अनवार से उठा न सकेहम अपने सोए हुए बख़्त को जगा न सके
हीरे मोती ला'ल जवाहर रोले भर भर थालीअपना कीसा अपना दामन अपनी झोली ख़ाली
पुरानी बातें पुरानी रस्में पलट रही हैंतुम उस घड़ी से डरो कि जब तुम भी सर झुकाए
घने भयानक अँधेरों की तहें चीर करइक काला फूल निकल आया है
अजीब क़िस्सा हैजब ये दुनिया समझ रही थी
समर-फ़रोश की निगाह-ए-दूरबीन मेंअंधेरा दरमियान से फटा
गुड्डे मियाँ की शादीहर इक सम्त गूँजे हुए क़हक़हे
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