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नज़्म
शुक्र शिकवे को किया हुस्न-ए-अदा से तू ने
हम-सुख़न कर दिया बंदों को ख़ुदा से तू ने
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
पत्ता पत्ता मिरे अफ़्सुर्दा लहू में धुल कर
हुस्न-ए-महताब से आज़ुर्दा नज़र आने लगा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
दिखा वो हुस्न-ए-आलम-सोज़ अपनी चश्म-ए-पुर-नम को
जो तड़पाता है परवाने को रुलवाता है शबनम को
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हुस्न-ए-अज़ल की है नुमूद चाक है पर्दा-ए-वजूद
दिल के लिए हज़ार सूद एक निगाह का ज़ियाँ!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
बुझ चुके हैं मिरे सीने में मोहब्बत के कँवल
अब तिरे हुस्न-ए-पशीमाँ से मुझे क्या लेना
साहिर लुधियानवी
नज़्म
जल्वा-ए-क़ुदरत का शाहिद हुस्न-ए-फ़ितरत का गवाह
माह का दिल मेहर-ए-आलम-ताब का नूर-ए-निगाह
जोश मलीहाबादी
नज़्म
तितली का नाज़-ए-रक़्स ग़ज़ाला का हुस्न-ए-रम
मोती की आब गुल की महक माह-ए-नौ का ख़म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
फ़िरदौस-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ है दामान-ए-लखनऊ
आँखों में बस रहे हैं ग़ज़ालान-ए-लखनऊ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तो मुझ पे करता था जादू सा हुस्न-ए-इंसानी
कुछ ऐसा होता था महसूस जब मैं देखता था
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
पहले तो हुस्न-ए-अमल हुस्न-ए-यक़ीं पैदा कर
फिर इसी ख़ाक से फ़िरदौस-ए-बरीं पैदा कर
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
तेरे जबीं से नूर-ए-हुस्न-ए-अज़ल अयाँ है
अल्लाह-रे ज़ेब-ओ-ज़ीनत क्या औज-ए-इज़्ज़-ओ-शाँ है