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नज़्म
गोशा गोशा तेरा नूर-ए-अलम से मा'मूर है
ज़र्रा ज़र्रा हामिल-ए-नूर-ए-चराग़-ए-तूर है
अर्श मलसियानी
नज़्म
हर एक क़ुमक़ुमा यहाँ चराग़-ए-कोह-ए-तूर है
हर इक फ़ज़ा पे रंग है हर एक सम्त नूर है
अर्श मलसियानी
नज़्म
तेरी पेशानी पे झलकेगा मिसाल-ए-बर्क़-ए-तूर
तिफ़्ल का नाज़-ए-शराफ़त और शौहर का ग़ुरूर
जोश मलीहाबादी
नज़्म
जल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़ल आए तसव्वुर में अगर
गोशा-ए-दिल में मचलते हुए अरमाँ होंगे
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
है नज़र-अफ़रोज़ अगरचे जल्वा-ए-बर्क़-ए-तपाँ
ख़िरमन-ए-दहक़ाँ से लेकिन पूछ उस की दास्ताँ