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नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
खटक कहाँ से हो अब दिल में कोई फाँस भी है
ख़ुदा का शकर कि मर्ज़ी की अब तो साँस भी है
सिराज लखनवी
नज़्म
न्यूज़ चैनल की छोटी गाड़ी बड़ी ख़बर की तलाश में है
दो सब्ज़ी वाले भी अपनी फेरी लगा रहे हैं
इमरान शमशाद नरमी
नज़्म
अहद-ए-गुल है और वही रंगीनी-ए-गुलज़ार है
ख़ाक-ए-हिंद अब तक अगर देखो तजल्ली-ज़ार है
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
कभी कभी ख़ार की खटक टीस बन के होंटों से झाँकती है
न-जाने कितने ही गीत थे जो बहार से पहले
ताबिश कमाल
नज़्म
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लुथड़े हुए ख़ून में नहलाए हुए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
सो गई रास्ता तक तक के हर इक राहगुज़ार
अजनबी ख़ाक ने धुँदला दिए क़दमों के सुराग़