आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khur"
नज़्म के संबंधित परिणाम "khur"
नज़्म
हर तबस्सुम में तुझे शाइबा-ए-ग़म दिखलाऊँ
ख़ून-ए-नाहक़ पे जो होता है वो मातम दिखलाऊँ
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
दम-ए-सुब्ह-ए-बहारी है रुख़-ए-ख़ुर पर नक़ाब-अफ़्गन
किसी आईने पर तार-ए-नफ़स जैसे बिखरते हैं
नज़्म तबातबाई
नज़्म
ये माना मग़रिबी तालीम ने पर्वाज़ बख़्शी है
ये माह-ओ-ख़ुर भी बन जाएँगे अब क़िंदील का शाना
बेबाक भोजपुरी
नज़्म
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लुथड़े हुए ख़ून में नहलाए हुए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
क़हर तो ये है कि काफ़िर को मिलें हूर ओ क़ुसूर
और बेचारे मुसलमाँ को फ़क़त वादा-ए-हूर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सीना-ए-दहर के नासूर हैं कोहना नासूर
जज़्ब है उन में तिरे और मिरे अज्दाद का ख़ूँ