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नज़्म
दूसरी बोली सच कहती हूँ मैं आदत से वाक़िफ़ हूँ
लाल खटोला हरे भरे तकिए उन पर लोट लगाते हैं
हामिदुल्लाह अफ़सर
नज़्म
करोड़ों इंसानों को तस्कीन देते हैं
बच्चे घास पर भागते दौड़ते उछलते कूदते और लोट-पोट होते हैं
मोहम्मद हनीफ़ रामे
नज़्म
मेरी नसीहत सुन कर अब वो कभी-कभी झुँझलाते हैं
और कभी तो हँसते-हँसते लोट-पोट हो जाते हैं
इशरत आफ़रीं
नज़्म
तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेश-क़दमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जल्वे पराए हैं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
गुल करो शमएँ बढ़ा दो मय ओ मीना ओ अयाग़
अपने बे-ख़्वाब किवाड़ों को मुक़फ़्फ़ल कर लो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मुझ से पहले कितने शा'इर आए और आ कर चले गए
कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नग़्मे गा कर चले गए
साहिर लुधियानवी
नज़्म
रास्ते में रुक के दम ले लूँ मिरी आदत नहीं
लौट कर वापस चला जाऊँ मिरी फ़ितरत नहीं