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नज़्म
तुझ से बढ़ कर फ़ितरत-ए-आदम का वो महरम नहीं
सादा-दिल बंदों में जो मशहूर है पर्वरदिगार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
महफ़िल-ए-साक़ी सलामत बज़्म-ए-अंजुम बरक़रार
नाज़नीनान-ए-हरम पर रहमत-ए-परवरदिगार
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
रग-ए-जहाँ में थिरक रही है शराब बन कर तिरी जवानी
दिमाग़-ए-परवर-दिगार में जो अज़ल के दिन से मचल रहा था
मजीद अमजद
नज़्म
जानता हूँ मौत का हम-साज़ ओ हमदम कौन है
कौन है पर्वरदिगार-ए-बज़्म-ए-मातम कौन है
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
खेलते हैं आज भी तुझ से यही सरमाया-दार
ये तमद्दुन के ख़ुदा तहज़ीब के पर्वरदिगार
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
क्यूँकि जो सब का है उस का भी है वो पर्वरदिगार
ख़्वेश-परवर हाकिमों में हो गया मेरा शुमार