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नज़्म
अना को मेरी बे-अंदाज़ा-तर बे-चारा कर डाला
मैं अपने आप में हारा हूँ और ख़्वाराना हारा हूँ
जौन एलिया
नज़्म
जहाँबानी से है दुश्वार-तर कार-ए-जहाँ-बीनी
जिगर ख़ूँ हो तो चश्म-ए-दिल में होती है नज़र पैदा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
हवस-कारी है जुर्म-ए-ख़ुद-कुशी मेरी शरीअ'त में
ये हद्द-ए-आख़िरी है मैं यहाँ तक जा नहीं सकता
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
है हर दम नाचने गाने का ये तार बँधाया होली ने
हर जागह थाल गुलालों से, ख़ुश-रंगत की गुल-कारी है
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
गाए हैं मैं ने ख़ुलूस-ए-दिल से भी उल्फ़त के गीत
अब रिया-कारी से भी चाहूँ तो गा सकता नहीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
वो जो पहले था कभी बंदर मदारी बन गया
या'नी मज़दूर अफ़सर-ए-सरमाया-कारी बन गया