आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "resho.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "resho.n"
नज़्म
सरमद सहबाई
नज़्म
रची है जिन के रेशों में कोई भूली हुई ख़ुश्बू
लिखे हैं जिन पे गुज़रे मौसमों के दिल-नशीं लम्हे
हमीदा शाहीन
नज़्म
मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
जब कभी बिकता है बाज़ार में मज़दूर का गोश्त
शाह-राहों पे ग़रीबों का लहू बहता है