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नज़्म
दौलत की सेवा करते हैं ठुकराए हुए हम दौलत के
मज़दूर हैं हम, मज़दूर हैं हम सौतेले बेटे क़िस्मत के
जमील मज़हरी
नज़्म
कि जब चौदह बरस के वास्ते श्री-राम को बन-वास जाना था
आमादा थे लखन भी भाई की सेवा में जाने को
त्रिपुरारि
नज़्म
एक इक बच्चा गई हो इल्म का चर्चा बढ़े
एक इक बच्चा धनी हो देस की सेवा करे
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
नज़्म
अज़मतुल्लाह ख़ाँ
नज़्म
नौ-जवानो अब हमें बेदार होना चाहिए
देश-सेवा के लिए तय्यार होना चाहिए
सरदार नौबहार सिंह साबिर टोहानी
नज़्म
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ख़ुद-कुशी शेवा तुम्हारा वो ग़यूर ओ ख़ुद्दार
तुम उख़ुव्वत से गुरेज़ाँ वो उख़ुव्वत पे निसार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कुछ ऐसा है ये मैं जो हूँ ये मैं अपने सिवा हूँ ''मैं''
सो अपने आप में शायद नहीं वाक़े हुआ हूँ मैं
जौन एलिया
नज़्म
मेरे माज़ी को अंधेरे में दबा रहने दो
मेरा माज़ी मिरी ज़िल्लत के सिवा कुछ भी नहीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
कार-ख़ानों के भूके जियालों के नाम
बादशाह-ए-जहाँ वाली-ए-मा-सिवा, नाएब-उल-अल्लाह फ़िल-अर्ज़