आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "zinda"
नज़्म के संबंधित परिणाम "zinda"
नज़्म
ज़मीं से नूरयान-ए-आसमाँ-परवाज़ कहते थे
ये ख़ाकी ज़िंदा-तर पाएँदा-तर ताबिंदा-तर निकले
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मैं न ज़िंदा हूँ कि मरने का सहारा ढूँडूँ
और न मुर्दा हूँ कि जीने के ग़मों से छूटूँ
साहिर लुधियानवी
नज़्म
जिस अहद-ए-सियासत ने ये ज़िंदा ज़बाँ कुचली
उस अहद-ए-सियासत को मरहूम का ग़म क्यूँ है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
ज़िंदा रहने के लिए इंसान को कुछ और भी दरकार है
और इस कुछ और भी का तज़्किरा भी जुर्म है