आम शायरी

असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर'

इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुँचा

अकबर इलाहाबादी

आम तेरी ये ख़ुश-नसीबी है

वर्ना लंगड़ों पे कौन मरता है

साग़र ख़य्यामी

मौसम तुम्हारे साथ का जाने किधर गया

तुम आए और बौर आया दरख़्त पर

अब्बास ताबिश

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