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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

दार पर शेर

नशेब-ए-हस्ती से अफ़्सोस हम उभर सके

फ़राज़-ए-दार से पैग़ाम आए हैं क्या क्या

कैफ़ी आज़मी

मेरे ही ख़ून में नहला के 'शरर'

वो सलीबों पे सजा देगा मुझे

शरर फ़तेह पुरी

हर रोज़ इक आवाज़ा अनल-हक़ का लगाएँ

देखें तो कि है सिलसिला-ए-दार कहाँ तक

ताबिश देहलवी

अब तो ज़रूरत की इक पगड़ी है यारों के कंधों पर

हम लोगों के साथ यहाँ से रस्म-ए-सलीब-ओ-दार उठी

राही मासूम रज़ा

जब अहल-ए-ख़िरद ने बात मानी

तो फिर शर्त-ए-सलीब-ओ-दार ठहरी

राही मासूम रज़ा

सूलियाँ नस्ब रहीं क़हत-ए-जुनूँ है भी तो क्या

कुछ कुछ अब भी निकल आएँगे गर्दन वाले

राही मासूम रज़ा
बोलिए