नींद पर चित्र/छाया शायरी

नींद और ख़्वाब शायरी

में बहुत मर्कज़ी मौज़ू के तौर पर नज़र आते हैं। हिज्र में नींद का उनका हो जाना, नींद आए भी तो महबूब के ख़्वाब का ग़ायब हो जाना और इस तरह की भी बहुत सी दिल-चस्प सूरतों उस शायरी में मौजूद हैं।

सुकून दे न सकीं राहतें ज़माने की

सुकून दे न सकीं राहतें ज़माने की

मौत बर-हक़ है एक दिन लेकिन

मौत बर-हक़ है एक दिन लेकिन

आई होगी किसी को हिज्र में मौत

नींद आती है अगर जलती हुई आँखों में

आई होगी किसी को हिज्र में मौत

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब

बोलिए