फ़ेमस शायरी पर चित्र/छाया शायरी

ये सारे अशआर आप सबने

पढ़े या सुने होंगे। इन अशआर ने एक तरह से ज़र्ब-उल-मसल की हैसियत पा ली है। उनमें से बहुत से अशआर आपको याद भी होंगे, लेकिन अपने इन पसंदीदा अशआर को एक जगह देखना यक़ीनन आपके लिए ख़ुशी का बाइस होगा।

कोई नाम-ओ-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना

सुब्ह होती है शाम होती है

तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो

वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है

दुनिया के जो मज़े हैं हरगिज़ वो कम न होंगे

कोई क्यूँ किसी का लुभाए दिल कोई क्या किसी से लगाए दिल

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह

सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह

शायद इसी का नाम मोहब्बत है 'शेफ़्ता'

हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी

बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम

चले तो पाँव के नीचे कुचल गई कोई शय

सुब्ह होती है शाम होती है

तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा

बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम

बोलिए