अल्ताफ़ हुसैन हाली के 10 बेहतरीन शेर

उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल/महत्वपूर्ण पूर्वाधुनिक शायर/ ग़ालिब की जीवनी ‘यादगार-ए-ग़ालिब लिखने के लिए प्रसिद्ध

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना

मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और

आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

सदा एक ही रुख़ नहीं नाव चलती

चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की

अल्ताफ़ हुसैन हाली

होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क-ए-इश्क़ की

दिल चाहता हो तो ज़बाँ में असर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

बहुत जी ख़ुश हुआ 'हाली' से मिल कर

अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जहाँ में

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

इश्क़ सुनते थे जिसे हम वो यही है शायद

ख़ुद-बख़ुद दिल में है इक शख़्स समाया जाता

अल्ताफ़ हुसैन हाली

फ़राग़त से दुनिया में हर दम बैठो

अगर चाहते हो फ़राग़त ज़ियादा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

दरिया को अपनी मौज की तुग़्यानियों से काम

कश्ती किसी की पार हो या दरमियाँ रहे

अल्ताफ़ हुसैन हाली

क़ैस हो कोहकन हो या 'हाली'

आशिक़ी कुछ किसी की ज़ात नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

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