गोविन्द गुलशन के शेर
पहले तलाश कीजिए मंज़िल की रहगुज़र
फिर सोचिए कि राह में दीवार कौन है
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टैग : मंज़िल
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ज़िद पर अड़े हुए हैं ये दिल भी दिमाग़ भी
अब देखना है इन में असर-दार कौन है
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टैग : दिल
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रहगुज़र है उदास मेरी तरह
जाने कब वो यहाँ से गुज़रेगा
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फिर मुझे याद आएगा बचपन
इक ज़माना गुमाँ से गुज़रेगा
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ज़ेहन और दिल में जो अन-बन है वो अन-बन न रहे
इस लिए दरमियाँ दीवार बना रक्खी है
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एक मुश्किल हो तो आसान बना ली जाए
उस ने तो ज़िंदगी दुश्वार बना रक्खी है