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गोविन्द गुलशन

1957 - 2026 | ग़ाज़ियाबाद, भारत

गोविन्द गुलशन

ग़ज़ल 30

अशआर 6

पहले तलाश कीजिए मंज़िल की रहगुज़र

फिर सोचिए कि राह में दीवार कौन है

ज़िद पर अड़े हुए हैं ये दिल भी दिमाग़ भी

अब देखना है इन में असर-दार कौन है

रहगुज़र है उदास मेरी तरह

जाने कब वो यहाँ से गुज़रेगा

ज़ेहन और दिल में जो अन-बन है वो अन-बन रहे

इस लिए दरमियाँ दीवार बना रक्खी है

फिर मुझे याद आएगा बचपन

इक ज़माना गुमाँ से गुज़रेगा

वीडियो 19

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

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