इक़बाल मतीन का परिचय
पहचान: प्रख्यात फ़िक्शन लेखक, शायर और ख़ाका निगार
इक़बाल मतीन 2 फरवरी 1929 को मोहल्ला रामकोट, हैदराबाद (दक्कन) में पैदा हुए। उनका असली नाम सैयद मसीहुद्दीन और तख़ल्लुस (उपन्याम) 'मतीन' था। उनके पिता सैयद अब्दुल क़ादिर 'नासिर' और चाचा तमकीन सरमस्त व नसीम क़ासिमी कवि थे, जिनके साए में उनके साहित्यिक झुकाव का विकास हुआ।
इक़बाल मतीन ने हैदराबाद के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों जैसे सिटी हाई स्कूल, दारुल उलूम कॉलेज और चादरघाट कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। इस दौरान उन्हें मख़दूम मुहीउद्दीन और डॉ. मुहीउद्दीन क़ादिर ज़ोर जैसे महान गुरुओं का मार्गदर्शन मिला। हैदराबाद के जागीर प्रशासन और बाद में राजस्व (माल) विभाग में सेवाएँ देते हुए वे नायब तहसीलदार के पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए।
इक़बाल मतीन के साहित्यिक जीवन की शुरुआत 1942 में कविता से हुई, लेकिन जल्द ही उन्होंने कहानी (अफ़साना) लेखन की ओर रुख किया। उनकी पहली कहानी "चूड़ियाँ" 1945 में प्रकाशित हुई। उनकी बुनियादी और वास्तविक पहचान एक कहानीकार के रूप में है। उन्होंने अपनी कहानियों में हैदराबाद के पतनशील जागीरदाराना जीवन, भौतिकवादी संस्कृति की उथल-पुथल, मानवीय व नैतिक मूल्यों के ह्रास और सांप्रदायिक नफ़रत को अपनी रचनाओं का विषय बनाया।
इक़बाल मतीन के सात कहानी संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें "उजली परछाइयाँ" (1960), "नुचा हुआ एल्बम", "ख़ाली पिटारियों का मदारी", "आगही के वीराने", "मज़बला", "मैं भी फ़साना तुम भी कहानी" और "शहर आशोब" (2003) शामिल हैं।
कहानियों के अलावा उन्होंने पूंजीवादी व्यवस्था के स्याह चेहरे पर आधारित एक लघु उपन्यास (नावलेट) "चराग़-ए-तह-ए-दामाँ" (1976) भी लिखा। उनके रेखाचित्रों का संग्रह "सोंधी मिट्टी के बुत", संस्मरणों पर आधारित पुस्तक "बातें हमारियां" और आलोचनात्मक निबंधों के संग्रह "एतराफ़ व इनहिराफ़" तथा "उजाले झरोखे में" (2008) साहित्यिक हलकों में काफ़ी लोकप्रिय हुए। उनका एक काव्य संग्रह "सरीर-ए-जाँ" भी प्रकाशित हुआ।
निधन: इक़बाल मतीन का इंतकाल 5 मई 2015 को हैदराबाद में हुआ।
सहायक लिंक : | https://ur.wikipedia.org/wiki/%D8%A7%D9%82%D8%A8%D8%A7%D9%84_%D9%85%D8%AA%DB%8C%D9%86