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बकुल देव

1980

हिन्दुस्तान की नई पीढ़ी के शायर

हिन्दुस्तान की नई पीढ़ी के शायर

ग़ज़ल 21

शेर 20

सम्त दुनिया के हम गए ही नहीं

उस इलाक़े से दुश्मनी सी रही

अब के ताबीर मसअला रहे

ये जो दुनिया है इस को ख़्वाब करो

मुस्कुराने का फ़न तो बअ'द का है

पहले साअ'त का इंतिख़ाब करो