शाहरुख़ अबीर
ग़ज़ल 9
अशआर 9
अपनी तस्वीर ऐसे मत देखो
आँख को आइना नहीं करते
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चलता है साथ साथ ख़मोशी का इक हुजूम
थक कर गिरेंगे हम तो सदाएँ लगाएँगे
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तुम को मालूम क्या है आज़ादी
तुम परिंदे रिहा नहीं करते
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शौक़-ए-दीदार में चले आए
चाँदनी रात और हम दोनों
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