Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Ali Akbar Dahkhuda's Photo'

अली अकबर दहख़ुदा

1879 - 1956 | अन्य, ईरान

महान फ़ारसी साहित्यकार, शब्दकोशकार और ‘लुग़तनामा-ए-दहख़ुदा’ के रचयिता

महान फ़ारसी साहित्यकार, शब्दकोशकार और ‘लुग़तनामा-ए-दहख़ुदा’ के रचयिता

अली अकबर दहख़ुदा का परिचय

उपनाम : 'दहख़ुदा'

मूल नाम : अली अकबर

निधन : 27 Feb 1956 | तेहरान

पहचान: महान फ़ारसी साहित्यकार, शब्दकोशकार, विख्यात व्यंग्यकार और ‘लुग़तनामा-ए-दहख़ुदा’ के रचयिता

अली अकबर ख़ान दहख़ुदा का जन्म 1879 ई. में तेहरान के संगलज मुहल्ले में हुआ। उनके पिता ख़ान बाबा ख़ान क़ज़वीन के एक मध्यमवर्गीय ज़मींदार थे। वे ईरान के महान साहित्यकार, शब्दकोशकार, कवि और राजनीतिज्ञ थे। वे फ़ारसी भाषा के महानतम शब्दकोश ‘लुग़तनामा-ए-दहख़ुदा’ के संस्थापक और रचयिता हैं। उन्हें आधुनिक ईरान का “फ़ारसी शब्दकोश का जनक” कहा जाता है।

दहख़ुदा ने प्रारंभिक पारंपरिक शिक्षा ग़ुलाम हुसैन बुरूजेर्दी से प्राप्त की। 1899 में उन्होंने तेहरान के मदरसए उलूम-ए-सियासी में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने आधुनिक विषयों और फ़्रांसीसी भाषा का अध्ययन किया।

शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे विदेश मंत्रालय से जुड़े और बाल्कन देशों में ईरानी राजदूत के सचिव के रूप में दो वर्ष वियना (ऑस्ट्रिया) में रहे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय समाज और आधुनिक ज्ञान का गहन अध्ययन किया।

ईरान लौटने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध पत्रिका ‘सूर-ए-इसराफ़ील’ के लिए लिखना शुरू किया। उनका व्यंग्य स्तंभ ‘चरंद ओ परंद’ फ़ारसी गद्य में एक नए युग की शुरुआत माना जाता है। वे ‘दख़ो’ उपनाम से लिखते थे।

वे ईरान के संवैधानिक आंदोलन के सक्रिय सदस्य थे, जिसके कारण मुहम्मद अली शाह के शासनकाल में उन्हें निर्वासित कर दिया गया।

निर्वासन के दौरान वे पेरिस और स्विट्ज़रलैंड में रहे, जहाँ उन्होंने ‘सूर-ए-इसराफ़ील’ का प्रकाशन जारी रखा।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने राजनीति से अलग होकर चहारमहल बख्तियारी के पर्वतीय क्षेत्र में निवास किया। वहीं उनके मन में फ़ारसी भाषा का एक व्यापक शब्दकोश तैयार करने का विचार उत्पन्न हुआ, जिसके लिए उन्होंने अमीर मुफख़्ख़म बख्तियारी के पुस्तकालय से लाभ उठाया।

दहख़ुदा ने अपने जीवन के अंतिम 40 वर्ष इस महान शब्दकोश के निर्माण में समर्पित कर दिए। इसके लिए उन्होंने लाखों शोध-पर्चियाँ तैयार कीं।

उनकी मृत्यु के बाद उनकी वसीयत के अनुसार डॉ. मुहम्मद मोईन, डॉ. मुहम्मद दबीर सियाक़ी, और सैयद जाफ़र शहीदी ने इस कार्य को पूरा किया।

यह शब्दकोश 26,000 से अधिक पृष्ठों पर आधारित है और फ़ारसी भाषा व साहित्य का सबसे प्रामाणिक ज्ञानकोश माना जाता है।

उनकी अन्य प्रसिद्ध कृतियों में ‘अम्साल ओ हिकम’ (चार खंडों में फ़ारसी कहावतों और कथाओं का संग्रह), ‘चरंद ओ परंद’ (व्यंग्य और सामाजिक निबंध), ‘तरजुमा-ए-रूहुल-क़वानिन’ (मोंतेस्क्यू की प्रसिद्ध पुस्तक The Spirit of Laws का फ़ारसी अनुवाद), और ‘शरह-ए-हाल अबू रैहान बिरूनी’ शामिल हैं।

उन्होंने कविता भी लिखी, जिसमें व्यंग्य, देशभक्ति और जनसहानुभूति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनकी प्रसिद्ध मुसद्दस ‘याद आर ज़ शम्अ-ए-मुर्दा याद आर’ फ़ारसी साहित्य का एक महान मरसिया माना जाता है।

निधन: 27 फ़रवरी 1956 (7 इस्फंद 1334 शम्सी) को तेहरान में उनका निधन हुआ और उन्हें शहर-ए-रे के प्रसिद्ध इब्न बाबूया कब्रिस्तान में दफ़्न किया गया।

Recitation

बोलिए