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रशीद अख़्तर नदवी का परिचय
पहचान: लोकप्रिय उपन्यासकार, इतिहासकार, पत्रकार और अनुवादक
रशीद अख्तर नदवी का जन्म 13 जनवरी 1918 को दिल्ली में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा यहीं प्राप्त की, फिर दारुल उलूम नदवतुल उलेमा का रुख किया और वहाँ से फ़ज़ीलत की डिग्री हासिल की। इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दाखिला लिया और बी.ए. की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को अपना क्षेत्र बनाया और दिल्ली, लाहौर तथा पेशावर के कई दैनिक अख़बारों में न्यूज़ एडिटर और चीफ़ एडिटर के रूप में कार्य किया। 1973 में उन्हें इदारा मआरिफ़-ए-मिल्ली (इस्लामाबाद) का सचिव नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने शैक्षिक और शोध गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
रशीद अख्तर नदवी एक बहुआयामी साहित्यिक व्यक्तित्व थे। वे एक साथ इतिहासकार, पत्रकार, अनुवादक और उपन्यासकार थे। अनुवाद के क्षेत्र में उनका बड़ा योगदान तुज़ुक-ए-बाबरी और हुमायूँनामा का फ़ारसी से उर्दू में अनुवाद है। इतिहास लेखन में उन्हें जीवनीपरक इतिहास से विशेष लगाव था, जिसकी झलक उनकी कृतियों मुहम्मद रसूल अल्लाह (बाद में संशोधित रूप में मुहम्मद सरवर-ए-दो आलम), ख़िलाफ़त-ए-राशिदा, उमर बिन अब्दुल अज़ीज़, सलाहुद्दीन अय्यूबी और औरंगज़ेब आदि में मिलती है।
साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने उर्दू उपन्यास को नई दिशा दी। उन्होंने लगभग दो दर्जन ऐतिहासिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और रोमांटिक उपन्यास लिखे, जिनमें साज़-ए-शिकस्ता, सोज़-ए-दरूँ, सौदाई, नसरीन और तश्नगी विशेष रूप से लोकप्रिय हुए। उनके उपन्यासों की प्रमुख विशेषताएँ सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा, जीवंत चरित्र-चित्रण, प्रभावी संवाद और मानवीय मनोविज्ञान की गहरी समझ हैं। उनके यहाँ दुख, सामाजिक अंतर्विरोध और मानवीय संघर्ष अत्यंत तीव्रता के साथ उभरते हैं।
निधन: 21 जुलाई 1992 को मरी (पाकिस्तान) में उनका निधन हुआ और इस्लामाबाद के केंद्रीय कब्रिस्तान में दफ़नाए गए।
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