- पुस्तक सूची 177849
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ76
बाल-साहित्य1985
नाटक / ड्रामा918 एजुकेशन / शिक्षण343 लेख एवं परिचय1376 कि़स्सा / दास्तान1580 स्वास्थ्य105 इतिहास3275हास्य-व्यंग607 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1707 पत्र736
जीवन शैली30 औषधि976 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4284 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4729 शोध एवं समीक्षा6588अफ़साना2686 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2032पाठ्य पुस्तक450 अनुवाद4242महिलाओं की रचनाएँ5849-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1277
- दोहा48
- महा-काव्य100
- व्याख्या180
- गीत63
- ग़ज़ल1255
- हाइकु12
- हम्द51
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1596
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात581
- माहिया20
- काव्य संग्रह4839
- मर्सिया386
- मसनवी747
- मुसद्दस41
- नात576
- नज़्म1189
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम33
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
सैफ़ी सिरोंजी का परिचय
तूफ़ान आए शहर में या कोई ज़लज़ला
मुझ को किसी भी बात का अब डर नहीं रहा
पहचान: बहुप्रज लेखक (ज़ूद-नवीस), साहित्यकार और कवि
सैफी सिरोंजी (वास्तविक नाम: रमज़ानी सैफी) का जन्म 1952 में मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज तहसील के महुआ खेड़ा गाँव में हुआ था।
सैफी सिरोंजी का बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहाँ शिक्षा का कोई विशेष चलन नहीं था। उनके अपने बयान के अनुसार, उन्होंने न कभी स्कूल का मुँह देखा और न ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक ज़रूरतों के कारण उन्होंने एक बीड़ी कारखाने में काम करना शुरू किया। यही कारखाना वास्तव में उनके साहित्यिक सफर की नींव बना, जहाँ काव्य गोष्ठियों और साहित्यिक माहौल ने उनकी छिपी हुई प्रतिभा को जागृत किया।
बिना किसी औपचारिक शिक्षा के उन्होंने स्वयं सीखने की प्रक्रिया जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी कविताएँ, नातें और गज़लें समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। बाद में लोगों की सलाह पर उन्होंने अदीब, माहिर और कामिल के पाठ्यक्रम पूरे किए और एम.ए. की डिग्री हासिल कर एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाई।
सैफी सिरोंजी एक अत्यंत सक्रिय और बहुप्रज लेखक हैं। उन्होंने लगभग 1500 गज़लें, सैकड़ों लेख और कई कहानियाँ लिखी हैं। उनके 8 कविता संग्रह, आलोचनात्मक लेखों की 8 पुस्तकें और कुल मिलाकर लगभग 75 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में "यह तो सच्चा किस्सा है" (आत्मकथा), "सिरोंज से लंदन तक", "मशाहिर के खतूत", "नए इमकानात", "जदीद शायरी का भूत" और "इक्कीसवीं सदी और उर्दू नावल" शामिल हैं।
उनकी आत्मकथा "यह तो सच्चा किस्सा है" विशेष रूप से लोकप्रिय हुई, जिस पर भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और कनाडा के कई लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए, और इन लेखों को एक संग्रह के रूप में भी प्रकाशित किया गया।
सैफी सिरोंजी एक सक्रिय साहित्यिक कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने पत्रिका "इंतसाब आलमी" के माध्यम से विभिन्न लेखकों पर विशेष अंक प्रकाशित किए हैं, जिनमें बशीर बद्र, खालिद महमूद, निदा फाज़ली, गोपी चंद नारंग, अंजुम उस्मानी और चंद्र भान ख्याल जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। पिछले कई वर्षों से वे इस पत्रिका में साहित्यिक हस्तियों पर निरंतर संपादकीय भी लिख रहे हैं।
संबंधित टैग
प्राधिकरण नियंत्रण :लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस नियंत्रण संख्या : n89215279
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ76
बाल-साहित्य1985
-
