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ज़ब्त अंसारी के शेर
ज़ब्त अंसारीइलाज-ए-दिल के लिए और अब कहाँ जाएँ
तुम्हारे शहर में सब कुछ मिला दवा के सिवा
ज़ब्त अंसारीबहुत से ग़म तो दिए 'ज़ब्त' ऐसे लोगों ने
कि जिन से कोई तवक़्क़ो न थी वफ़ा के सिवा
ज़ब्त अंसारीथे मेरी राह में लाखों बुतान-ए-नख़वत-ओ-नाज़
कहीं भी सर न झुका तेरे नक़्श-ए-पा के सिवा
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