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ग़ालिब अकेडमी, देहली

3,419 पुस्तकें /5,285 पत्रिकाएँ

पुस्तकालय: परिचय

ग़ालिब अकादमी एक शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं शोध संस्थान है, जिसकी स्थापना 1969 में हकीम अब्दुल हमीद ने मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब की स्मृति में की थी। इसका उद्घाटन 22 फ़रवरी 1969 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन ने ग़ालिब शताब्दी समारोह के अवसर पर किया। यह संस्थान निज़ामुद्दीन बस्ती, दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह और मिर्ज़ा ग़ालिब के मक़बरे के निकट स्थित है।

ग़ालिब अकादमी की स्थापना ग़ालिब की साहित्यिक विरासत, उनके युग तथा उर्दू भाषा की बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, अनुसंधान और प्रकाशन के उद्देश्य से की गई। अकादमी में ग़ालिब संग्रहालय, शोध पुस्तकालय, कला दीर्घा, सभागार, शोध विभाग, प्रकाशन केंद्र तथा राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (NCPUL) के सहयोग से स्थापित कम्प्यूटरीकृत सुलेख प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।

अकादमी के शोध पुस्तकालय में ग़ालिब, उनके युग और उर्दू साहित्य से संबंधित दुर्लभ पुस्तकों, पांडुलिपियों तथा संदर्भ ग्रंथों का समृद्ध संग्रह सुरक्षित है। इसका लाभ भारत और विदेशों के शोधकर्ता, साहित्यकार, कवि तथा विद्यार्थी उठाते हैं। अकादमी के प्रकाशनों को उर्दू अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है, जबकि इसके पुस्तकालय में संरक्षित अनेक संदर्भ ग्रंथ अन्यत्र उपलब्ध नहीं हैं।

ग़ालिब अकादमी उर्दू भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए नियमित रूप से सेमिनार, मुशायरे, कार्यशालाएँ, साहित्यिक गोष्ठियाँ, प्रदर्शनियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती है, जिनमें ग़ालिब तथा अन्य प्रमुख उर्दू साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया जाता है। पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से यह संस्थान उर्दू भाषा, साहित्यिक अनुसंधान, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके बहुमूल्य संग्रह का एक चयनित भाग अब रेख़्ता डिजिटल लाइब्रेरी पर भी उपलब्ध है, जहाँ विश्वभर के पाठक और शोधकर्ता इसका लाभ उठा सकते हैं।

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