अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

इन्दिरा वर्मा

अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

इन्दिरा वर्मा

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    अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

    अभी तो अपने सफ़र की है इब्तिदा साहब

    How can I call you unfaithful already

    When this is only the beginning of our journey, sahab

    जाने कितने लक़ब दे रहा है दिल तुम को

    हुज़ूर जान-ए-वफ़ा और हम-नवा साहब

    My heart is bestowing so many titles upon you,

    Lord, Life of my Faith, the One who Speaks with Me, sahab

    तुम्हारी याद में तारे शुमार करती हूँ

    जाने ख़त्म कहाँ हो ये सिलसिला साहब

    I count the stars in your memory

    Who knows where this series will end, sahab

    किताब-ए-ज़ीस्त का उनवान बन गए हो तुम

    हमारे प्यार की देखो ये इंतिहा साहब

    You have become the title of the book of life

    Such is the extent of my love, sahab

    तुम्हारा चेहरा मिरे अक्स से उभरता है

    जाने कौन बदलता है आईना साहब

    Your face rises out my reflection

    Who knows who changes the mirror, saheb

    रह-ए-वफ़ा में ज़रा एहतियात लाज़िम है

    हर एक गाम पे होता है हादसा साहब

    A little caution is necessary on the path of loyalty

    At every steps an accident takes place, sahab

    सियाह रात है महताब बन के जाओ

    ये 'इंदिरा' के लबों पर है इल्तिजा साहब

    Come, like the moon on a dark night

    This is the entreaty on Indira's lips, sahab

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    रेखा भारद्वाज

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