नअत
दाग़ देहलवी के समकालीन। अपनी ग़ज़ल ' सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता ' के लिए प्रसिद्ध हैं।
उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल/महत्वपूर्ण पूर्वाधुनिक शायर/मिजऱ्ा ग़ालिब की जीवनी ‘यादगार-ए-ग़ालिब लिखने के लिए प्रसिद्ध
बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और एंटी-स्टैब्लिशमेंट शायरी के लिए प्रसिद्ध
प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान, फ़क़ीह, नात-गो कवि और 'आला हज़रत' की उपाधि से प्रसिद्ध