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अफ़ज़ल गौहर राव

1965 | सरगोधा, पाकिस्तान

ग़ज़ल 16

शेर 16

चंद लोगों की मोहब्बत भी ग़नीमत है मियाँ

शहर का शहर हमारा तो नहीं हो सकता

हिज्र में इतना ख़सारा तो नहीं हो सकता

एक ही इश्क़ दोबारा तो नहीं हो सकता

तू परिंदों की तरह उड़ने की ख़्वाहिश छोड़ दे

बे-ज़मीं लोगों के सर पर आसमाँ रहता नहीं

मैं एक इश्क़ में नाकाम क्या हुआ 'गौहर'

हर एक काम में मुझ को ख़सारा होने लगा

गुमराह कब किया है किसी राह ने मुझे

चलने लगा हूँ आप ही अपने ख़िलाफ़ में

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