ग़ज़ल 22

शेर 6

कौन डूबेगा किसे पार उतरना है 'ज़फ़र'

फ़ैसला वक़्त के दरिया में उतर कर होगा

जो रेज़ा रेज़ा नहीं दिल उसे नहीं कहते

कहें आईना उस को जो पारा-पारा नहीं

अंग अंग से रंग रंग के फूल बरसते देखे कौन

रंग रंग से शोले बरसे कैसे बरसे सोचे कौन

उन से मेरी बात पूछ

उन से मेरी अन-बन है

मैं मकीं हूँ मकाँ शहर-ए-मोहब्बत का 'ज़फ़र'

दिल मुसाफ़िर किसी ग़ैर के घर जाएगा

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