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अंदलीब शादानी

1904 - 1969 | ढाका, बंगलादेश

रोमानी ग़ज़ल के शायर, अनुवादक, संपादक अपनी ग़ज़ल " देर लगी आने में लेकिन ..." के लिए प्रसिद्ध

रोमानी ग़ज़ल के शायर, अनुवादक, संपादक अपनी ग़ज़ल " देर लगी आने में लेकिन ..." के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 6

शेर 6

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

आस ने दिल का साथ छोड़ा वैसे हम घबराए तो

Am grateful you came finally, though you were delayed

hope had not forsaken me, though must say was afraid

Am grateful you came finally, though you were delayed

hope had not forsaken me, though must say was afraid

दिल पर चोट पड़ी है तब तो आह लबों तक आई है

यूँ ही छन से बोल उठना तो शीशे का दस्तूर नहीं

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चाहत के बदले में हम बेच दें अपनी मर्ज़ी तक

कोई मिले तो दिल का गाहक कोई हमें अपनाए तो

in exchange for love I'd trade my freedom I confess

if a buyer could be found who would my heart possess

in exchange for love I'd trade my freedom I confess

if a buyer could be found who would my heart possess

ई-पुस्तक 19

Addurriuz Zahir

 

1924

Daur-e-Hazir Aur Urdu Ghazal Goi

 

1951

Daur-e-Hazir Aur Urdu Ghazal Goi

 

 

डॉ अंदलीब शादानी

हयात और कारनामे

1992

Nishat-e-Rafta

 

1851

Tahqeeqat

 

 

तहक़ीक़ात

 

 

ख़ावर

Shumara Number-002

1952

ख़ावर

Shumara Number-003

1952

ख़ावर

Shumara Number-006

1952

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