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अंदलीब शादानी

1904 - 1969 | ढाका, बंगलादेश

रोमानी ग़ज़ल के शायर, अनुवादक, संपादक अपनी ग़ज़ल " देर लगी आने में लेकिन ..." के लिए प्रसिद्ध

रोमानी ग़ज़ल के शायर, अनुवादक, संपादक अपनी ग़ज़ल " देर लगी आने में लेकिन ..." के लिए प्रसिद्ध

अंदलीब शादानी

ग़ज़ल 6

शेर 7

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

आस ने दिल का साथ छोड़ा वैसे हम घबराए तो

दिल पर चोट पड़ी है तब तो आह लबों तक आई है

यूँ ही छन से बोल उठना तो शीशे का दस्तूर नहीं

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उफ़ वो तूफ़ान-ए-शबाब आह वो सीना तेरा

जिसे हर साँस में दब दब के उभरता देखा

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चाहत के बदले में हम बेच दें अपनी मर्ज़ी तक

कोई मिले तो दिल का गाहक कोई हमें अपनाए तो

झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दुहराती है

अच्छा मेरा ख़्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो

पुस्तकें 22

Addurriuz Zahir

 

1924

Ahsanur Risala

Urdu Tarjama Chahar Maqala

1930

Daur-e-Hazir Aur Urdu Ghazal Goi

 

1962

डॉ अंदलीब शादानी

हयात और कारनामे

1992

Naqsh-e-Badi

 

1923

Nishat-e-Rafta

 

1951

Tahqeeqat

 

 

तहक़ीक़ात

 

 

ख़ावर

Shumara Number-002

1952

ख़ावर

Shumara Number-003

1952

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