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असद भोपाली

1921 - 1990 | भोपाल, भारत

फ़िल्म गीतकार

फ़िल्म गीतकार

ग़ज़ल 13

शेर 15

इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले

वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते

हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे

अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई

जब ज़रा रात हुई और मह अंजुम आए

बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए

ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन

मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है

बज़्म अपनी अपना साक़ी शीशा अपना जाम अपना

अगर यही है निज़ाम-ए-हस्ती तो ज़िंदगी को सलाम अपना

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पुस्तकें 2

Monogaraph Asadullah Khan Asad Bhopali

 

2017

Roshni, Dhoop, Chandni

 

1995

 

चित्र शायरी 2

न बज़्म अपनी न अपना साक़ी न शीशा अपना न जाम अपना अगर यही है निज़ाम-ए-हस्ती तो ज़िंदगी को सलाम अपना

 

ऑडियो 5

कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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