Manzar Bhopali's Photo'

मंज़र भोपाली

1959 | भोपाल, भारत

ग़ज़ल 14

नज़्म 1

 

शेर 18

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई

ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई

बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता

इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुँवारी है

अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें

हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत

पुस्तकें 2

Lahoo Rang Mosam

 

1994

Ye Sadi Hamari Hai

 

1991

 

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