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आसिफ़ बनारसी

1901 - 1977 | ढाका, बंगलादेश

आसिफ़ बनारसी

अशआर 2

अभी आँखों ही को दे बज़्म में गर्दिश साक़ी

यही पैमाने छलकते रहें जाम आने तक

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दम भर के लिए होती है तस्कीन सी दिल को

आगे बढ़ा इस से असर अपनी दुआ का

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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