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शायर और लेखक

शायर और लेखक

ग़ज़ल 16

शेर 34

हम ने घर की सलामती के लिए

ख़ुद को घर से निकाल रक्खा है

तू अपनी मर्ज़ी के सभी किरदार आज़मा ले

मिरे बग़ैर अब तिरी कहानी नहीं चलेगी

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लहजे और आवाज़ में रक्खा जाता है

अब तो ज़हर अल्फ़ाज़ में रक्खा जाता है

एक लम्हे को सही उस ने मुझे देखा तो है

आज का मौसम गुज़िश्ता रोज़ से अच्छा तो है

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हमें रोको नहीं हम ने बहुत से काम करने हैं

किसी गुल में महकना है किसी बादल में रहना है

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