ग़ज़ल 3

 

शेर 2

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा

वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा

एक मंज़िल है मगर राह कई हैं 'अज़हर'

सोचना ये है कि जाओगे किधर से पहले

 

पुस्तकें 1

Deewan-e-Safdar Mirzapuri

 

1984

 

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