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अज़ीज़ अन्सारी

इंदौर, भारत

अज़ीज़ अन्सारी

ग़ज़ल 7

नज़्म 1

 

अशआर 4

अम्न और आश्ती से उस को क्या

उस का मक़्सद तो इंतिशार में है

ये अपनी बेबसी है या कि अपनी बे-हिसी यारो

है अपना हाथ उन के सामने जो ख़ुद भिकारी हैं

हमारी मुफ़्लिसी आवारगी पे तुम को हैरत क्यूँ

हमारे पास जो कुछ है वो सौग़ातें तुम्हारी हैं

अपने लिए ही मुश्किल है

इज़्ज़त से जी पाना भी

पुस्तकें 6

 

वीडियो 7

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Ghut ghut ke mar jana bhi, hasna aur hasana bhi_Ghazal

अज़ीज़ अन्सारी

Hum usko bhool baithe hain andhre humpe taari hain

अज़ीज़ अन्सारी

Naadar mein imdad ka jazba bhi to dekho

अज़ीज़ अन्सारी

Raaz qudrat ke humne na jaane kai

अज़ीज़ अन्सारी

Sukoon-e-dil hua haasil, bala se maal-o-zar khoya

अज़ीज़ अन्सारी

घुट घुट कर मर जाना भी

अज़ीज़ अन्सारी

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

अज़ीज़ अन्सारी

"इंदौर" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

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