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अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

फतेहपुर, भारत

जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ पहुँचा

दुआ भी काम आए कोई दवा लगे

शहर हो दश्त-ए-तमन्ना हो कि दरिया का सफ़र

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है

ये बात सच है कि मरना सभी को है लेकिन

अलग ही होती है लज़्ज़त निगाह-ए-क़ातिल की

ज़मीर बेचने वाले वो तेरा सौदा-गर

ज़मीर ही नहीं ज़ात सिफ़ात ले के गया

डूबा सफ़ीना जिस में मुसाफ़िर कोई था

लेकिन भरे हुए थे वहाँ ना-ख़ुदा बहुत

शायद यही किताब-ए-मोहब्बत हो ला-जवाब

मेरी वफ़ा के साथ है तेरी जफ़ा बहुत