ग़ज़ल 8

शेर 3

तेरे नाम का तारा जाने कब दिखाई दे

इक झलक की ख़ातिर हम रात भर टहलते हैं

गूँजूँगा तेरे ज़ेहन के गुम्बद में रात-दिन

जिस को तू भुला सके वो गुफ़्तुगू हूँ मैं

  • शेयर कीजिए

ख़ुद अपनी ही गहराई में

आख़िर को ग़र्क़ाब हुए हम

 

पुस्तकें 1

Shumara Number-035,036

1985

 

"रावलपिंडी" के और शायर

  • साबिर ज़फ़र साबिर ज़फ़र
  • अख़्तर होशियारपुरी अख़्तर होशियारपुरी
  • बाक़ी सिद्दीक़ी बाक़ी सिद्दीक़ी
  • जमील मलिक जमील मलिक
  • परवीन फ़ना सय्यद परवीन फ़ना सय्यद
  • मंज़ूर आरिफ़ मंज़ूर आरिफ़
  • जलील ’आली’ जलील ’आली’
  • अफ़ज़ल मिनहास अफ़ज़ल मिनहास
  • नवेद फ़िदा सत्ती नवेद फ़िदा सत्ती
  • इमरान आमी इमरान आमी