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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Bismil Aghai's Photo'

बिस्मिल आग़ाई

1931 | हैदराबाद, भारत

बिस्मिल आग़ाई के शेर

हर सम्त है वीरानी सी वीरानी का आलम

अब घर सा नज़र आने लगा है मिरा घर भी

होती रही आँखों से जो यूँ ख़ून की बारिश

दिल ख़त्म हो जाए जिगर ख़त्म हो जाए

सिमटा तिरा ख़याल तो दिल में समा गया

फैला तो इस क़दर कि समुंदर लगा मुझे

हर नश्तर-ए-तफ़रीक़ ने मरहम का किया काम

तोड़े गए लेकिन मिरे अहबाब टूटे

फिर गर्दिश-ए-दौराँ से उलझना नहीं मुश्किल

ग़ुर्बत में जो पिंदार-ए-तब-ओ-ताब टूटे

घर में भी नज़र आएँगे अंदाज़-ए-बयाबाँ

जब तक मिरी वहशत का असर ख़त्म हो जाए

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