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बिस्मिल आग़ाई

1931 | हैदराबाद, भारत

ग़ज़ल 8

शेर 2

सिमटा तिरा ख़याल तो दिल में समा गया

फैला तो इस क़दर कि समुंदर लगा मुझे

हर सम्त है वीरानी सी वीरानी का आलम

अब घर सा नज़र आने लगा है मिरा घर भी

 

पुस्तकें 2

Rubaiyat-e-Sadiq

 

1968

Silsila-e-Khwab

 

1980

 

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