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चन्द्रभान ख़याल

1946 | दिल्ली, भारत

नज़्म के जाने माने शायर

नज़्म के जाने माने शायर

ग़ज़ल 17

शेर 19

वक़्त और हालात पर क्या तब्सिरा कीजे कि जब

एक उलझन दूसरी उलझन को सुलझाने लगे

इंसान की दुनिया में इंसाँ है परेशाँ क्यूँ

मछली तो नहीं होती बेचैन कभी जल में

हमारे घर के आँगन में सितारे बुझ गए लाखों

हमारी ख़्वाब गाहों में चमका सुब्ह का सूरज

सुब्ह आती है दबे पाँव चली जाती है

घेर लेता है मुझे शाम ढले सन्नाटा

वो जहाँ चाहे चला जाए ये उस का इख़्तियार

सोचना ये है कि मैं ख़ुद को कहाँ ले जाऊँगा

पुस्तकें 6

Ehsas Ki Aanch

 

2015

Gumshuda Aadmi Ka Intizar

 

1997

Intikhab Kumar Pashi

 

1996

लौलाक

 

2002

Sholon Ka Shajar

 

1979

Sulagti Soch Ke Saye

 

2002

 

ऑडियो 5

अगर क़रीब से देखो

आज फिर दर्द उठा

क़तरा क़तरा एहसास

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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