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फ़रहत कानपुरी

1905 - 1952 | कानपुर, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 6

दिल की राहें जुदा हैं दुनिया से

कोई भी राहबर नहीं होता

दुनिया ने ख़ूब समझा दुनिया ने ख़ूब परखा

मेरी नज़र को देखा जब आप की नज़र से

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आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर

दिल ही में रह जाओ आँखों से निहाँ हो कर

रुबाई 2

 

पुस्तकें 1

नर्म झोंकों की सदा

शेरी मजमूआ

2008

 

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